अख्तर हुसैन कुतुबुद्दीन अहमद नाम के एक व्यक्ति को मुंबई पुलिस ने गिरफ्तार किया है , जो खुद को भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर (BARC) का वैज्ञानिक बताकर फर्जी पाचन के साथ कई सालों से कर रहा था. उसके पास से कई फर्जी दस्ताबेज मिला है . जैसे फर्जी पहचान पत्र , पासपोर्ट, डिग्रियां और परमाणु बम से जुडी अति संवेदनशील फाईलें व नक़्शे बरामद हुए हैं.
- आरोपी ने BARC वैज्ञानिक बनकर खुद को “अली राजा हुसैन “ और एलेग्जेंडर पल्मेर जैसे नामों से पेश किया .
- उसके पास से 14 अति संवेदनशील नक़्शे और नुक्लेअर बम ब्लूप्रिंट मिलें हैं, जिनसे सुरक्षा एजेंसियों में हडकंप मच गया .
- मुंबई पुलिस को तीन पासपोर्ट, कई फर्जी एजुकेशनल सर्टिफिकेट (10वी, 12वी,बी.ई., MBA आदि ) मिले .
- अख्तर हुसैन कुतुबुद्दीन अहमद ने फर्जी पहचान के आधार पर विदेश की यात्राएं भी चूका था .
- देश की जांच एजेंसियाँमान रही हैं कियह मामला केवल फर्जीवाडा नहीं, बल्कि जासूसी (स्पिओनगे ) से जुड़ा हो सकता है .
वैक्तिगत पहचान
- असली नाम: अख्तर हुसैन क़ुतुबुद्दीन अहमद
- अख्तर कुतुबुद्दीन की उम्र लगभग 60 साल बताई जा रही है.
- निवास स्थान : वेसोवा – यारी रोड क्षेत्र में एक मकान
- परिवार: एक भाई – आदिल हुस्सैनी – भी पुलिस की जांच में शामिल है.
जांच में पता चला है कि वो पिचले 30 साल से BARC का फर्जी साइंटिस्ट बना हुआ है. अख्तर 20बार इरान 15 बार सऊदी अरब समेत मास्को, रूस और थाईलैंड की यात्रा कर चूका है .
मुंबई पुलिस ने जब अख्तर से जुडी जानकारी खंगाली , तो एक के बाद एक चौकाने वाले राज सामने आने लगे . अख्तर और उसके भाई आदिल हुसैन के नाम पर कई बैंक खाते मिले . इनमें एक खता प्राइवेट बैंक का था, जिसमें 2001 में विदेश से भरी मात्रा में पैसा आया था . पुलिस ने अख्तर को यारी रोड से गिरफ्तार किया . वहीँ , उसके भाई को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में लिया है .
मुंबई क्राइम ब्रांच के अधिकारी के अनुसार, अख्तर को 1996 से ही विदेश से पैसे मिल रहे हैं. इनमें ज्यादातर पैसे अमेरिका, इरान और इराक जैसे देशों से आते हैं . पैसा भेजने वाले स्रोतों का पता नहीं चल पाया है. मुंबई क्राइम ब्रांच इसकी जाच कर रही है.