किसी ने ठीक ही कहा है जैसा आप सोचते हो और जैसा आप करते हो, तो, आज नहीं तो कल आप वैसा बन जाते हो ! अगर आप अपने लिए लक्ष्य बड़ा रखेंगे तो सफलता भी बड़ा हासिल करोगें ।
यहाँ मैं आपको बताना चाहूंगा की सफलता का मायने अलग-अलग वयक्ति के लिए अलग-अलग होता है कोई वयक्ति सफलता का मतलब अपने सरकारी जॉब को हासिल करना और कुछ लोग अपने लिए खूब पैसा कमा लेना समझते हैं। दरअसल हरेक आदमी का अपना एक सपना होता है, जिसको वह सच होते देखना चाहता है। इसमें कुछ भी गलत नहीं है, किन्तु हमें यह समझना चाहिए की बड़े सपने ही हमें बड़ी सफलता ता पंहुचा सकते हैं।
अगर हम अपने लिए साधारण लक्ष्य निर्धारित करेंगे तो हम कभी बड़े मुकाम तक नहीं पहुंच सकते। हलाकि आपने लोगों को इसके विपरीत यह कहते भी सुना होगा की आदमी को छोटी-छोटी सफलताएं हासिल करते हुए आगे बढ़ाना चाहिए। यह बात वास्तव में लक्ष्य की नहीं, उस तक पहुंचने की रणनीति से सम्बंधित है, जो अपनी जगह बिलकुल ठीक है, पर यह आपको बड़ा सपना देखने से मन नहीं करती। इस सच्चाई को साबित किया शाज़िया क़ैसर भागलपुर में पैदा हुई थीं और उन्होंने यूनिसेफ़ और डब्ल्यूएचओ के साथ काम किया है। उसके पास फिजियोथेरेपी की डिग्री भी है।
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| लक्ष्य जितना बड़ा होगा सफलता भी उतनी ही बड़ी होगी |
कैसे हुई शुरुआत : ‘पापा को लगा कि जब यही सब करना था तो इतनी पढ़ाई-लिखाई क्यों की. शोरूम खोल लो… कोई और डीसेंट काम कर लो… ये जूते चप्पल का काम क्यों करोगी?’ मायके वालों को लग रहा था कि नाम खराब हो जाएगा. उन्हें लग रहा था, सफेद कोट में एसी में काम करने वाले लोग जब ‘जूते-चप्पल ठीक’ करेंगे तब कितना बुरा लगेगा. ये सब काम वैसे भी मर्दों को शोभा देते हैं. फुटवियर सेक्शन वैसे भी पुरुषप्रधान सेक्टर है. 36 साल की शाज़िया से हमने जब पूछा कि यहां कौन जूते ठीक करवाने के लिए स्पेशल सर्विस लेता है? यह तो भारत में चलन ही नहीं है. तब वह बोलीं – फोन और टीवी को लेकर तो सर्विस सेंटर होता है लेकिन मंहगे से मंहगे जूतों के लिए कोई सर्विस सेंटर नहीं है. रीटेलरों से संपर्क किया और कहा कि कस्टमर्स और अपने खुद के प्रॉडक्ट से जुड़ी समस्या के लिए हमें काम दें. शाज़िया बताती हैं, ‘शुरू में ऐसे जूते देते थे जो पूरी तरह से टूटे फूटे हों और सड़क पर फेंक दिए गए हों… हालांकि हमने वह भी ठीक करके दिया. ऐसी कुछ घटनाओं के बाद उनका हम पर विश्वास बना… हमें काम देने लगे और हम मेहनत करके उन्हें अच्छे से लौटाते.’ कहती हैं शाज़िया. ‘अब सोसायटीज़ में जाकर अपने बिजनस का प्रचार करते हैं ताकि लोगों को पता चले कि इस तरह का आपका काम भी होता है. पिक एंड ड्रॉप फैसिलिटी हम देते हैं.’
शाज़िया कहती हैं, ‘कस्मटर से उन्हें फीडबैक जब मिला तब उन्हें मुझ पर भरोसा बना. लोगों को भी सर्विस लेने के बाद ‘अडिक्शन’ हो गया… आखिर क्लीन शूज पहनने की आदत हो गई.’ अब काम मिलता है और अच्छे से मिलता है. यह सही है कि उनकी ग्रोथ दिन दूनी, रात चौगुनी नहीं है. अन्य कुछ बिजनेसेस के मुकाबले उनकी ग्रोथ स्लो है
शाज़िया क़ैसर ने बिहार में 2014 में अपनी सेवा, रिवाइवल शू लॉन्ड्री शुरू की। पहले 2 से 3 वर्षों के लिए, उसने मुख्य रूप से बाजार अनुसंधान पर ध्यान केंद्रित किया।
यह सेवा बैग और जैकेट जैसे चमड़े की वस्तुओं की सफाई और नवीनीकरण से संबंधित है और जूते की मरम्मत भी प्रदान करती है। शाज़िया ने 1 लाख रुपये की बचत करके इस स्टार्टअप की शुरुआत की।
उसके व्यवसाय के पहले कुछ वर्ष लाभदायक नहीं थे और उसने नुकसान उठाया और अपने परिवार से मदद की आवश्यकता की लेकिन उसने कठिनाई का सामना किया और कभी हार नहीं मानी। वह जितनी संभव हो उतनी महिलाओं को रोजगार देने की कोशिश करती है।
कारोबार शुरू करने वाली औरतों के लिए आपका कोई संदेश?
शाज़िया कहती हैं – आप जिस भी आइडिया पर काम करना चाहती हों जो भी बिजनेस करना चाहती हों तो पहले मार्केट सर्वे कर लें. पूरी प्लानिंग कर लें. यानी, ‘फंडामेंटल ऑफ दैट बिजनेस’ आप समझ लेती हैं तो आपको अपनी राह चलना और सफलता प्राप्त करना अपेक्षाकृत आसान हो जाता है. इसलिए जो भी काम करना है, उसे लेकर होमवर्क कर लें. ताकि जिस बिजनस को आप करना चाहती हैं उसे लेकर कम से कम दिक्कतें आएं.
और ठीक इसी प्रकार रमणदीप अरोड़ा ने जो गुरुग्राम में एडटेक स्टार्टअप एडवाइज़र का संचालन कर युवाओ को उन कौशलों से लैस करने में मदद करते हैं , जिनसे उन्हें नौकरी पाने में मदद मिलती है।
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| रमणदीप अरोड़ा, एडटेक संस्थापक और सीईओ, एडवाइजर, गुड़गांव, |
एडटेक स्टार्टअप एडवाइज़र इस समय कॉर्पोरेट जगत के एक हजार से अधिक सेंटर से जुड़ा है। इस साल की शुरुआत में इसने एक अकादमी की स्थापना की, जो एक जोबतक प्लेटफार्म है और जिसका दायरा वैश्विक है। अब यह अपने ऑनलाइन प्रशिक्षण सत्रों को फिजिकल टीचिंग के साथ मिलकर कयापक बनाने को प्रयासरत है।
चुनौतियों से कभी भी अपना लक्ष्य मत त्याग देना, बाद में बहुत पछताओगे ! क्योकि चुनौतियां लक्ष्य तक पहुंचने की रह में ली जाने वाली परीक्षाएं हैं। उनसे हमेशा कुछ नया करने के लिए प्रेरणा भी मिलती है।
धन्यवाद्
नवित न्यूज़ – सच के साथ



